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Q&A
11:37 AM | 08-04-2020

What is the standard BP and pulse of a healthy old man aged 72-73 years?


The answers posted here are for educational purposes only. They cannot be considered as replacement for a medical 'advice’ or ‘prescription’. ...The question asked by users depict their general situation, illness, or symptoms, but do not contain enough facts to depict their complete medical background. Accordingly, the answers provide general guidance only. They are not to be interpreted as diagnosis of health issues or specific treatment recommendations. Any specific changes by users, in medication, food & lifestyle, must be done through a real-life personal consultation with a licensed health practitioner. The views expressed by the users here are their personal views and Wellcure claims no responsibility for them.

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2 Answers

07:51 PM | 09-04-2020

The way the World Health Organization has maintained the standard way of calculating the blood pressure, which is:

Whatever is your age, + 100

For example: If your age is 72 then ideal standard Blood pressure with your age is 172 is considered as normal and diastolic around 100. Above it would be at high risk.  Average blood pressure of a newborn is around 60/40. Blood pressure rises as we grow old. The pulse is measured in the range of 60-100 of all age groups.

This is how you can get your standard blood pressure counted.

Thank you.



08:26 PM | 08-04-2020

हेलो,
एक स्वस्थ व्यक्ति का बीपी, शुगर मेजरमेंट करना प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति के अनुसार ठीक नहीं है। क्योंकि स्वास्थ्य की निशानी है कि आप को अच्छा  भूख लगना चाहिए। मानसिक और शारीरिक कार्य संतुलित रूप से आप कर पा रहे हैं। आपको अच्छी नींद आ रही है।

 प्राकृतिक निष्कासन पद्धति ठीक रूप से काम कर रहा है तो आप स्वस्थ हैं। आपको अगर ऊर्जा में कोई कमी नहीं लगती है, आपको अगर स्वास्थ्य में किसी तरह की कमी नहीं है तो आप स्वस्थ हैं स्वस्थ होने की यह सभी निशानी है और स्वास्थ्य में कमी ही बीमारी होती है। इसका कोई मानक नहीं होता है  क्योंकि गांधीजी का 220 / 120 रहता था। जबकि वह पूर्ण रूप से स्वस्थ थे। मशीनों से एलोपैथिक जगत में यह पैरामीटर जो सेट किए गए हैं, यह स्वास्थ्य को नहीं दर्शाता है। स्वास्थ्य को दर्शाने का जो पैरामीटर है। भूख लगना, ऊर्जा में कोई कमी ना होना, अच्छी नींद होना, चलने फिरने में या किसी काम करने में किसी भी तरीके का दर्द खिंचाव कड़ापन नहीं होना,  प्राकृतिक रूप से मल मूत्र का त्याग होना स्वत: ही जरूरी होता है। प्राकृतिक जीवन शैली को जिया जाए तो मनुष्य किसी भी उम्र में स्वस्थ रह सकता है उम्र बढ़ता जाएगा लेकिन साथ ही स्वास्थ्य भी बढ़ता जाएगा। स्वास्थ्य की कमी ही बीमारी है।

सुबह की शुरुआत हर्बल जूस से करें। 2 घंटे बाद नाश्ते में फल ले लो। फल मौसम के हिसाब से होना चाहिए एक ही तरीके का फल खाएं। दोपहर का भोजन कच्ची सब्जियों का सलाद होना चाहिए, जिसमें नमक, नींबू का प्रयोग ना हो। धनिया पत्ता, टमाटर और नारियल पीसकर मिला सकते हैं। टमाटर से नमक की रिक्वायरमेंट खत्म हो जाएगी। नारियल आपको बेहतर टेस्ट देगा और धनिया पत्ता उसको खुशबूदार बना देगा। एक बार शाम को पका हुआ भोजन ले। पके हुए भोजन में भी सब्जियों में पकी हुई सब्जियों का मात्रा अधिक होना चाहिए। अनाज की मात्रा कम होना चाहिए इससे हमारे पाचन तंत्र पर दबाव कम पड़ता है और स्वास्थ्य में वृद्धि होती है।

जीवन शैली - शरीर पाँच तत्व से बना हुआ है प्रकृति की ही तरह।

आकाश, वायु, अग्नि, जल, पृथ्वी ये पाँच तत्व आपके शरीर में रोज़ खुराक की तरह जाना चाहिए।

पृथ्वी और शरीर का बनावट एक जैसा 70% पानी से भरा हुआ। पानी जो कि फल, सब्ज़ी से मिलता है।

1 आकाश तत्व- एक खाने से दूसरे खाने के बीच में विराम दें। रोज़ाना 15 घंटे का उपवास करें जैसे रात का भोजन 7 बजे तक कर लिया और सुबह का नाश्ता 9 बजे लें।

2 वायु तत्व- लंबा गहरा स्वाँस अंदर भरें और रुकें फिर पूरे तरीक़े से स्वाँस को ख़ाली करें रुकें फिर स्वाँस अंदर भरें ये एक चक्र हुआ। ऐसे 10 चक्र एक टाइम पर करना है। ये दिन में चार बार करें।

दौड़ लगाएँ। सूर्य नमस्कार 5 बार करें।

3 अग्नि तत्व- सूरर्य उदय के एक घंटे बाद या सूर्य अस्त के एक घंटे पहले का धूप शरीर को ज़रूर लगाएँ। सर और आँख को किसी सूती कपड़े से ढक कर। जब भी लेंटे अपना दायाँ भाग ऊपर करके लेटें ताकि आपकी सूर्य नाड़ी सक्रिय रहे।

4 जल तत्व- खाना खाने से एक घंटे पहले नाभि के ऊपर गीला सूती कपड़ा लपेट कर रखें और खाना के 2 घंटे बाद भी ऐसा करना है।

नीम के पत्ते का पेस्ट अपने नाभि पर रखें। 20मिनट तक रख कर साफ़ कर लें।

मेरुदंड स्नान के लिए अगर टब ना हो तो एक मोटा तौलिया गीला कर लें बिना निचोरे उसको बिछा लें और अपने मेरुदंड को उस स्थान पर रखें।

खाना खाने से एक घंटे पहले नाभि के ऊपर गीला सूती कपड़ा लपेट कर रखें या खाना के 2 घंटे बाद भी ऐसा कर सकते हैं।

मेरुदंड (स्पाइन) सीधा करके बैठें। हमेशा इस बात ध्यान रखें और हफ़्ते में 3 दिन मेरुदंड का स्नान करें।

पेट पर खीरा का पेस्ट 20 मिनट लगाएँ। फिर साफ़ कर लें। पैरों को 20 मिनट के लिए सादे पानी से भरे किसी बाल्टी या टब में डूबो कर रखें।

5. पृथ्वी तत्व- कच्चे सब्ज़ी का जूस आपका मुख्य भोजन है।  सुबह ख़ाली पेट इनमे से कोई भी हरा जूस लें।पेठे (ashgourd ) का जूस लें और  नारियल पानी भी ले सकते हैं। बेल का पत्ता 8 से 10 पीस कर 100ml पानी में मिला कर छान कर पीएँ। खीरा 1/2 भाग धनिया पत्ती (10 ग्राम) पीस लें, 100 ml पानी में मिला कर पीएँ। दुब घास 25 ग्राम पीस कर छान कर 100 ml पानी में मिला कर पीएँ। ये जूस सुबह नाश्ते से एक घंटे पहले लें। नाश्ते में फल लें। दोपहर के खाने से एक घंटा पहले हरा जूस लें। खाने में सलाद नमक सेंधा ही प्रयोग करें। नमक की पके हुए खाने में भी बहुत कम लें। सब्ज़ी पकने बाद उसमें नमक डालें। नमक पका कर या अधिक खाने से शरीर में (fluid)  की कमी हो जाती।

सलाद दोपहर 1बजे बिना नमक के खाएँ तो अच्छा होगा क्योंकि नमक सलाद के गुणों को कम कर देता है। सलाद में हरे पत्तेदार सब्ज़ी को डालें और नारियल पीस कर मिलाएँ। कच्चा पपीता 50 ग्राम कद्दूकस करके डालें। कभी सीताफल (yellow pumpkin) 50 ग्राम ऐसे ही डालें। कभी सफ़ेद पेठा (ashgourd) 30 ग्राम कद्दूकस करके डालें। ऐसे ही ज़ूकीनी 50 ग्राम डालें।कद्दूकस करके डालें।कभी काजू बादाम अखरोट मूँगफली भिगोए हुए पीस कर मिलाएँ। लाल, हरा, पीला शिमला मिर्च 1/4 हिस्सा हर एक का मिलाएँ। शाम 5 बजे नारियल पानी लें।

रात के खाने में इस अनुपात से खाना खाएँ 2 कटोरी सब्ज़ी के साथ 1कटोरी चावल या 1रोटी लें। रात 8 बजे के बाद कुछ ना खाएँ, 12 घंटे का (gap) अंतराल रखें। 8बजे रात से 8 बजे सुबह तक कुछ नहीं खाना है।

6. एक नियम हमेशा याद रखें ठोस (solid) खाने को चबा कर तरल (liquid) बना कर खाएँ। तरल  को मुँह में घूँट घूँट पीएँ। खाना ज़मीन पर बैठ कर खाएँ। खाते वक़्त ना तो बात करें और ना ही TV और mobile को देखें।ठोस  भोजन के तुरंत बाद या बीच बीच में जूस या पानी ना लें। भोजन हो जाने के एक घंटे बाद तरल पदार्थ  ले सकते हैं।जानवरों से उपलब्ध होने वाले भोजन वर्जित हैं।

तेल, मसाला, और गेहूँ से परहेज़ करेंगे तो अच्छा होगा। चीनी के जगह गुड़ लें।

हफ़्ते में एक दिन उपवास करें। शाम तक केवल पानी लें, प्यास लगे तो ही पीएँ। शाम 5 बजे नारियल पानी और रात 8 बजे सलाद लें।

धन्यवाद।

रूबी, 

प्राकृतिक जीवनशैली प्रशिक्षिका व मार्गदर्शिका (Nature Cure Guide & Educator)


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