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Q&A
01:15 PM | 07-12-2020

Hi sir/mam is I'm 40 yrs old, diagnosed with pelvic endometriosis and chocolate cysts in both ovaries. Is it reversible or curable?


The answers posted here are for educational purposes only. They cannot be considered as replacement for a medical 'advice’ or ‘prescription’. ...The question asked by users depict their general situation, illness, or symptoms, but do not contain enough facts to depict their complete medical background. Accordingly, the answers provide general guidance only. They are not to be interpreted as diagnosis of health issues or specific treatment recommendations. Any specific changes by users, in medication, food & lifestyle, must be done through a real-life personal consultation with a licensed health practitioner. The views expressed by the users here are their personal views and Wellcure claims no responsibility for them.

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4 Answers

02:41 PM | 11-12-2020

Hello Gayathri,

Endometriosis is a common disorder in which the lining of the uterus, known as the endometrium, grows outside the uterus and onto the ovaries, fallopian tubes and other areas of the reproductive tract.
Chocolate cysts are a subgroup of endometriosis. They may be a result of endometriosis. The lining of these cysts acts much the way the lining of the uterus does. It grows and then shed in response to the changes in hormones level. Instead of leaving the body, this tissue becomes trapped in the cavity of the cyst. Here it can produce inflammation and disrupt the ovaries.

Here are some tips to follow for management. 

Diet to follow- 

  • Eating processed and preserved foods may contribute to inflammation. So, avoid processed, preserved and packaged foods. 
  • Add fruits, legumes and vegetables in your diet. 
  • Eat nuts, sprouts and soaked raisins in the morning. 
  • Add iron-rich foods like broccoli, spinach to your diet.
  • Have magnesium-rich foods like almonds, cashews and bananas.
  • Include turmeric and cinnamon in your diet. Turmeric has anti-inflammatory properties and cinnamon has positive effects.
  • Avoid caffeine. 
  • Avoid carbonated drinks. 
  • Say no to alcohol, tobacco. 
  • Avoid dairy products and animal products. 

Exercise 

Doing yoga is very beneficial for ovarian cysts.

  • Perform bhujanga asana, vriksha asana and padahasta asana. 
  • Do pranayam regularly specially anulom-vilom pranayam. 
  • Take sunrays regularly in the morning for at least 20min. 

Sleep

Sleeping pattern is very essential for a healthy hormonal balance. Hence, take proper sleep of at least 7-8 hours daily. Sleep early at night and also wake up early in the morning. 

Thank you



11:19 AM | 09-12-2020

हेलो,

कारण - गर्भाशय की लाइनिंग को एंडोमेट्रियम कहते हैं। जब ओवरी, बाउल और पेल्विस की लाइनिंग के ऊतकों पर एंडोमेट्रियल टिश्‍यू विकसित होने लगते हैं, तब एंडोमेट्रियोसिस की समस्‍या उत्‍पन्‍न होती है। यह लंबे समय तक खराब हाजमा और दवाइयों के साइड इफेक्ट से होता है। 

हार्मोन के असंतुलन से ओवेरियन सिस्ट बनता है। अंडाशय सिस्ट जो बंद थैलीनुमा (sac like) आकृति के होते हैं और उनमें तरल पदार्थ भरा होता है। ये शरीर में खराब हाजमा के कारण बनता है। इसको ठीक होने में 8 से 10 महीने का समय लगेगा। आहार शैली में परिवर्तन और प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति को अपनाकर पूर्ण स्वास्थ्य पा सकते हैं।

समाधान- 1. पेट पर खीरा और नीम के पत्ते का पेस्ट 20 मिनट तक लगाकर छोड़ें।

2. हरे पत्ते का जूस आपको बहुत फायदा करेगा कोई भी हरा पत्ता दूब घास, बेलपत्र या पालक के पत्ते का जूस खाली पेट में 200 ml पिएं।

3. खाना खाने से घंटा पहले या खाना खाने के 2 घंटे बाद पेट पर गिला कपड़ा लपेटकर रखें ऐसा करने से हाजमा दुरुस्त होगा।

हफ्ते में 3 दिन एकदम में पानी भरे नाभि तक वह पानी रहना चाहिए उसमें बैठे 20 मिनट बाद उसे बाहर निकले यह आपके गर्भाशय को स्वच्छ करने में मुख्य भूमिका निभाएगा। हफ्ते में 3 दिन मेरुदंड स्नान करें एक गीला तोलिया बिनानी निचोड़े योगा मैट पर बिछाए और अपनी रीढ़ की हड्डी से लेकर कंधे तक का हिस्सा यानी अपनी पूरी रीढ़ की हड्डी को गीले तौलिए पर रखें 20 मिनट बाद वहां से उठ जाए।

जीवन शैली-  1आकाश तत्व - एक खाने से दुसरे खाने के बीच में अंतराल (gap) रखें।

फल के बाद 3 घंटे, सलाद के बाद 5 घंटे, और पके हुए खाने के बाद 12 घंटे का (gap) रखें।

2.वायु तत्व - प्राणायाम करें, आसन करें। दौड़ लगाएँ।

3.अग्नि - सूर्य की रोशनी लें।

4.जल - अलग अलग तरीक़े का स्नान करें। मेरुदंड स्नान, हिप बाथ, गीले कपड़े की पट्टी से पेट की गले और सर की 20 मिनट के लिए सेक लगाए। 

स्पर्श थरेपी करें। मालिश के ज़रिए भी कर सकते है।

कपूर मिश्रित नारियल तेल से पेट पर घड़ी की सीधी दिशा (clockwise) में और घड़ी की उलटी दिशा (anti clockwise)में मालिश करें। नरम हाथों से बिल्कुल भी प्रेशर नहीं दें।

5.पृथ्वी - सुबह खीरा 1/2 भाग धनिया पत्ती (10 ग्राम) पीस लें, 100 ml पानी मिला कर पीएँ। यह juice आप कई प्रकार के ले सकते हैं। पेठे (ash guard ) का जूस लें और कुछ नहीं लेना है। नारियल पानी भी ले सकते हैं। पालक  पत्ते धो कर पीस कर 100 ml पानी डाल पीएँ। दुब घास 25 ग्राम पीस कर छान कर 100 ml पानी में मिला कर पीएँ। कच्चे सब्ज़ी का जूस आपका मुख्य भोजन है। 2 घंटे बाद फल नाश्ते में लेना है।

फल को चबा कर खाएँ। इसका juice ना लें। फल सूखे फल नाश्ते में लें।

दोपहर के खाने में सलाद नट्स और अंकुरित अनाज के साथ  सलाद में हरे पत्तेदार सब्ज़ी को डालें और नारियल पीस कर मिलाएँ। कच्चा पपीता 50 ग्राम कद्दूकस करके डालें। कभी सीताफल ( yellow pumpkin)50 ग्राम ऐसे ही डालें। कभी सफ़ेद पेठा (ash guard) 30 ग्राम कद्दूकस करके डालें। ऐसे ही ज़ूकीनी 50 ग्राम डालें।कद्दूकस करके डालें।कभी काजू बादाम अखरोट मूँगफली भिगोए हुए पीस कर मिलाएँ। 

लाल, हरा, पीला शिमला मिर्च 1/4 हिस्सा हर एक का मिलाएँ। लें। बिना नींबू और नमक के लें। स्वाद के लिए नारियल और herbs मिलाएँ।

रात के खाने में इस अनुपात से खाना खाएँ 2 कटोरी सब्ज़ी के साथ 1कटोरी चावल या 1रोटी लेएक बार पका हुआ खाना रात को 7 बजे से पहले लें।

6.सेंधा नमक केवल एक बार पके हुए खाने में लें। जानवरों से उपलब्ध होने वाले भोजन वर्जित हैं।

तेल, मसाला, और गेहूँ से परहेज़ करेंगे तो अच्छा होगा। चीनी के जगह गुड़ लें।

7.एक नियम हमेशा याद रखें ठोस(solid) खाने को चबा कर तरल (liquid) बना कर खाएँ। तरल  को मुँह में घूँट घूँट पीएँ। खाना ज़मीन पर बैठ कर खाएँ। खाते वक़्त ना तो बात करें और ना ही TV और mobile को देखें।ठोस  भोजन के तुरंत बाद या बीच बीच में जूस या पानी ना लें। भोजन हो जाने के एक घंटे बाद तरल पदार्थ ले सकते हैं।

हफ़्ते में एक दिन उपवास करें। शाम तक केवल पानी लें, प्यास लगे तो ही पीएँ। शाम 5 बजे नारियल पानी और रात 8 बजे सलाद लें।

8.उपवास के अगले दिन किसी प्राकृतिक चिकित्सक के देख रेख में टोना लें। जिससे आँत की प्रदाह को शांत किया जा सके। एनिमा किट मँगा लें। यह किट ऑनलाइन मिल जाएगा। इससे 200ml पानी गुदाद्वार से अंदर डालें और प्रेशर आने पर मल त्याग करें। ऐसा दिन में दो बार करना है अगले 21 दिनों के लिए। ये करना है ताकि शरीर में मोजुद विषाणु निष्कासित हो जाये। इसके बाद हफ़्ते में केवल एक बार लेना है उपवास के अगले दिन। टोना का फ़ायदा तभी होगा जब आहार शुद्धि करेंगे।

धन्यवाद।

रूबी, 

प्राकृतिक जीवनशैली प्रशिक्षिका व मार्गदर्शिका (Nature Cure Guide & Educator)



03:07 PM | 07-12-2020

Namaskar!

We do understand your concern!

To begin with, please understand that as per the Nature Cure approach the body is seen as a whole unit and therefore any health issue (physical/mental) is concerned with the overall functioning and internal state of balance. Owing to wrong lifestyle choices, toxins get accumulated in the body and disrupt the internal balance. Our gastrointestinal tract ( GI Tract or GUT) is a long tube inhabited by millions of microbes and about 70% of our health depends on the quality of the gut. These microbes play a crucial role in communicating with the brain. When the sensitive balance of gut flora (microbes) is disturbed it affects our mental health too. 

If we support the body with the right inputs in terms of food as well as non-food elements (like sleep, exercise, relaxation, etc.) we can prevent and heal mental health issues. We would thereby encourage you to adopt a natural lifestyle to deal with your condition. You can explore our Natural Health Coaching Program that helps you in making the transition, step by step. 

In the meantime, you may find it helpful to explore these resources:

  1. Blogs 

    1. Tension, anxiety and depression - Deal with it naturally

  2. Real-life natural healing stories of people who could take care of their anxiety just by following Natural Laws

Regards,

Team Wellcure

10:00 PM | 08-12-2020

thank u😊

Reply


03:03 PM | 07-12-2020

Dear Gayathri,

We do understand your concern about your health condition. Women's health-related issues such as ovarian cysts, PCOD, endometriosis, etc. are often linked to hormonal imbalance. We would like to draw your attention to the Nature Cure perspective on the same.

Nature Cure believes that the root cause of most diseases/health conditions is Toxaemia- the accumulation of toxins within the body.  While some toxins are an output of metabolism, others are added due to unnatural lifestyle- wrong food habits, lack of rest and stress. Nature has equipped us with the measures of eliminating the toxins on a regular basis - through breathing, stool, urine, sweat, mucus depositions in nose, eyes and genitals etc. Whenever there is toxic overload due to insufficient or faulty elimination our body tries to throw out the toxins in the form of Flu, Loose-motions, cough, cold, fever, skin rashes and acute pain. Defying the body’s demand for rest and/ or suppressing the discomforting symptoms by quick-fixes like medicines, leads to an imbalance in the body. If there is a toxic overload on the body, it can prevent the hormones from performing their routine functions.

One can reverse this state of imbalance by getting back in sync with the natural laws of living. Our Natural Health Coach can look into your routine in a more comprehensive way and give you an action plan. Shifting to a natural lifestyle will also help you deal with all your other health issues. You can explore our  Natural Health Coaching Program for the same.  

In the meantime, you may read this blog - Pcos/Pcod - a rising problem in women today

We encourage you to take charge of your health and  be inspired by Women’s Health stories in our Journeys section - click here

Wish you all the best for your good health!

Regds

Team Wellcure

09:54 PM | 08-12-2020

Thank u 😊

Reply

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